*माता पिता का ऋण हम जिवन पर्यन्त नही उतार सकतेमाता पिता का ऋण हम जिवन पर्यन्त नही उतार सकते*

राजोद- श्री जबरेश्वर महादेव मंदिर ' कबीट गली राजोद पर श्री शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक पं. श्री दिपेश पाठक जी द्वारा गणेश चरित्र, कार्तिक चरित्र, युद्ध संहिता, जालंधर वध, शंख चूर्ण के अंधक वध की कथा सुनाई, उन्होंने कहा कि जीस तरह गणेश जी ने माता - पिता की परिक्रमा करके अपने पिता भगवान शंकर को प्रसन्न किया और वे प्रथम पूज्य कहलाये । इसी तरह हमे भी अपने माता - पिता की सेवा करना चाहिए । माता पिता का ऋण हम जिवन पर्यन्त नही उतार सकते हैं । जिस तरह से भगवान शंकर ने विष पिया था और वे निलकंठेश्वर कहलाये , उसी तरह हमे भी अपने जीवन मे कभी कभी विष पिना पड़ता है। लेकिन हर परिस्थिति हर कठिनाई में संघर्ष करके ही हम अपना जीवन संवार सकते हैं ।आज की युवा पिड़ी अनुशासन, संस्कार भुल गई है हमें उन्हे धार्मिक कथाओ के माध्यम से ज्ञान देना चाहिए ताकि वे अपना जीवन संवार सके ।