महेंद्र चौहान रिपोर्टर
लाखो करोड़ों की नल जल योजना का सत्यानाश करने वाले छोटे से लेकर बड़े कर्मचारी और अधिकारी आराम से ऐ. सी. में बैठे हैं । इन अधिकारियों ने अपने स्वार्थ के चलते पारा नगर में पानी की किल्लत इतनी बड़ा दी हे की आज पारा नगर पानी के लिए तरस रहा है। जिसकी सुध लेने वाला कोई भी नहीं है। इसके साथ ही पारा के समीप बहुत बड़ा डेम होने के बाद भी पारा पानी को तरस रहा है जिसका कारण लगता है यहां के बड़े नेताओं की उदासीनता भी हो सकती हैं। क्योंकि पारा के समीप बने हुए धमोई तालाब का पानी पारा लाने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे है। इतना समीप होते हुए भी पारा को पानी नहीं मिलते हुए, झाबुआ और मेघनगर जा रहा है। धमोई से जा रहे पानी का उपयोग पारा को क्यों नहीं करने दिया जा रहा यहां के अधिकारियों और नेताओं की उदासीनता के साथ पारा क्षेत्र के राज्यमंत्री एवं काफी समय से राजनीति में अपना दमखम रखने वाले नेताओ का क्षेत्र है।किंतु न इंसान न जानवरो के पानी के लिए कोई सहयोगी नहीं बन रहे है। आखिर इस सौतेले व्यवहार की वजह क्या है यह तो भगवान ही जाने है। जब आज इंसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है तो जरा विचार कीजिए जानवरो का क्या हाल हो रहा होगा ।