छतरपुर
01मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की हृदयस्पर्शी पहल: "सपनों की उड़ान"
मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत की हृदयस्पर्शी पहल: "सपनों की उड़ान" मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने दिव्यांग बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए एक उल्लेखनीय कदम उठाया है। "सपनों की उड़ान" पहल के तहत मुख्य न्यायाधीश ने पांच बच्चों के लिए हवाई यात्रा का आनंद लेना संभव बना दिया है। हाल ही में संवाद परामर्श के दौरान, एक बच्चे ने हवाई जहाज में उड़ान भरने के अपने सपने को साझा किया। इस हार्दिक इच्छा से प्रेरित होकर, मुख्य न्यायाधीश ने सत्र में भाग लेने वाले सभी पांच बच्चों के लिए एक विशेष आनंद सवारी की व्यवस्था की। 7 जनवरी, 2025 को बच्चे जबलपुर से इंदौर
मुख्यमंत्री जन सेवा प्रथम निराकरण की सफलता के बाद चलाया जा रहा मुख्यमंत्री जन सेवा अभियान का द्वितीय चरण।
रिपोर्टर - अमित परौहा संग रमाकांत दुबे। लोकेशन - ग्राम छतरपुर पनागर मुख्यमंत्री जन सेवा प्रथम की सफलता के बाद,चलाया जा रहा है मुख्यमंत्री जन सेवा द्वितीय चरण। जिसमें निम्न विभाग राजस्व विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग , पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, योजना आर्थिक एवं शासकीय विभाग, लोक सेवा एवं परिवार कल्याण विभाग, ऊर्जा विभाग, श्रम विभाग, आदि जाति कल्याण विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, एवं सहकारिता विभाग सरपंच दुखीराम माझी, के द्वारा जनता ओं की समस्याओं को सुना गया एवं संबंधित अधिकारियों को निराकरण के लिए भेजा गया जिस में शामिल सरपंच पीसीओ अधिकारी राजेंद्र प्रसाद कॉल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सीमा राय, एव
कथा संपन्न होने के बाद यजमान की पत्नी को भगा ले गया कथावाचक धीरेंद्र आचार्य का शिष्य
मध्यप्रदेश के छतरपुर में एक यजमान को रामकथा करवाना बड़ा महंगा पड़ गया. हुआ यूं कि कथावाचन के लिए आए कथावाचक का शिष्य ही यजमान की पत्नी को भगाकर ले गया. पीड़ित पति ने कोतवाली थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई. इस पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया. एक महीने बाद जब शिकायतकर्ता की पत्नी मिल गई तो पुलिस ने उसे बयान लेने थाने बुलाया. लेकिन महिला ने पति के साथ रहने से इनकार करते हुए चित्रकूट धाम के धीरेंद्र आचार्य के शिष्य नरोत्तम दास दुबे के साथ रहने की इच्छा जताई. दरअसल, मामला साल 2021 से शुरू हुआ था. जब महिला के पति राहुल तिवारी ने गौरीशंकर मंदिर में रामकथा का आयोजन करवाया था. कथा
⚡पूर्व सीएम के इलाके में खाट पर लिटाकर मरीजो को ऐसे अस्पताल पहुंचाते हैं⚡।
*कंधों पर खाट उठाकर गांव के लोग मरीज को अस्पताल पहुंचाते हैं* छतरपुर जिले के बड़ामलहरा के रानीखेरा गांव से एक मरीज को खाट पर लिटाकर, कंधों पर खाट को उठाकर गांव के लोग अस्पताल पहुंचाने के लिए बरसाती नाला पार कराते नजर आ रहे हैं। दरअसल इस बडे़ नाले पर पुल नहीं है। बारिश में यदि कोई मरीज बीमार हो जाए तो उसे मजबूरी में गांव के लोग ऐसे ही अस्पताल पहुंचाते हैं। बता दें कि यह इलाका पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती के गृह क्षेत्र के अधीन आता हैं। मप्र के बुंदेलखंड को यूं ही पिछड़ा इलाका नहीं कहा जाता। बारिश के दौरान यहां के पिछड़ेपन की तस्वीरें खुद सबकुछ बयां करती हैं। छतरपुर जिले के बड़ामलहरा के रानीखेरा गां
नदी में फंसे युवकों के लिए चट्टान बनी वरदान।
*तीन घंटे उसी के सहारे बीच मझधार में बची जान* मप्र में छतरपुर जिले के नौगांव-पलेरा के बीच धसान नदी में दो युवक बाढ़ के दौरान नदी के बीचों-बीच फंस गए। करीब तीन घंटे उनके लिए नदी के बीच में स्थित एक बड़ी चट्टान वरदान बन गई। उनके साथ तीन अन्य साथी भी थे, लेकिन जैसे ही पानी बढ़ना शुरु हुआ, वे किनारे पहुंचने में सफल रहे, लेकिन दो युवक हिम्मत नहीं जुटा पाए। बाद में एसडीआरएफ की टीम ने करीब एक घंटे रेस्क्यु आॅपरेशन चलाकर इनको सुरक्षित निकाल लिया। बताया जा रहा है कि युवक नदी में मछली पकड़ने गए थे। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार छतरपुर जिले में नौगांव व पलेरा के बीच गरौली गांव से धसान नदी निकली है। इस नदी म
