37.50 लाख के पंचायत भवन निर्माण में गुणवत्ता पर सवाल, सालभर बाद भी अधूरा काम!
पिपरिया परोहा में धीमी गति से चल रहा निर्माण, खिड़की-दरवाजों की गुणवत्ता और सरपंच पति की भूमिका पर उठे सवाल
कटनी :-कटनी जिले के जनपद पंचायत रीठी अंतर्गत ग्राम पंचायत पिपरिया परोहा में 37 लाख 50 हजार रुपये की लागत से नवीन पंचायत भवन का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति, खिड़की-दरवाजों की गुणवत्ता और कार्य की देखरेख को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों के बीच निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर चर्चा है।
बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य शुरू हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद भवन का काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। इतनी बड़ी राशि से तैयार हो रहे पंचायत भवन में चार से पांच कमरे बनाए जा रहे हैं, लेकिन निर्माण में लगाए जा रहे खिड़की-दरवाजों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि भवन में हल्के दरवाजे और खिड़कियां लगाकर निर्माण कार्य को जल्द समेटने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
सरपंच पति की भूमिका पर सवाल
ग्राम पंचायत में महिला सरपंच शकुन बाई कोल के निर्वाचित होने के बावजूद पंचायत के अधिकांश कार्य उनके पति द्वारा संचालित किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि निर्माण कार्य की देखरेख से लेकर मजदूरों के कामकाज तक में सरपंच पति की भूमिका प्रमुख बनी हुई है। आरोप यह भी है कि मजदूरी का खर्च बचाने के उद्देश्य से सरपंच पति स्वयं निर्माण कार्य में श्रम कर रहे हैं।
वहीं, महिला सरपंच की पंचायत के कार्यों में सक्रियता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि वह पंचायत कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होतीं और घर से ही सरकारी राशि निकालने की प्रक्रिया तक सीमित रहती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
जिम्मेदार अधिकारी क्यों साधे हैं चुप्पी?
37 लाख 50 हजार रुपये की लागत से बन रहे पंचायत भवन में निर्माण की गुणवत्ता, कार्य की समयसीमा और राशि के उपयोग की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित विभागीय अधिकारियों की है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य की गति धीमी क्यों है? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया है? क्या कार्य का नियमित निरीक्षण हो रहा है? और यदि निर्माण में कोई कमी है, तो अब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों की मांग है कि पंचायत भवन निर्माण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता, मजदूरी के भुगतान, स्वीकृत प्राक्कलन और खर्च की गई सरकारी राशि का भौतिक सत्यापन किया जाए। साथ ही, महिला सरपंच की भूमिका और पंचायत के कार्यों में उनके पति की कथित दखलंदाजी की भी नियमानुसार जांच हो।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सरकारी राशि के उपयोग की जांच कराते हैं या फिर 37.50 लाख रुपये की लागत से बन रहे पंचायत भवन पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
