सेलिब्रिटी वास्तु शास्त्री डॉ सुमित्रा अग्रवाल
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महेश गणावा रिपोर्टर
अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के निर्माण की प्रक्रिया बिल्कुल प्राकृतिक और चमत्कारिक है इस गुफा में प्राकृतिक बर्फबारी से लगातार शिवलिंग के निर्माण होते रहते हैं इसके अलावा भी लोग यह मानते हैं कि यहां पर कई प्रकार के देवी देवताओं की आकृतियां बर्फ के माध्यम से बनती हैं और यही कारण है कि अमरनाथ मंदिर में बर्फ के शिवलिंग बनने के कारण इन्हें बर्फानी और हिमानी बाबा कहकर बुलाया जाता है।
अमरनाथ से जुड़ी हुई पौराणिक अमर कथा का रहस्य
अमरनाथ मंदिर में शिवलिंग के साथ-साथ इनसे ही गणेश और पार्वती पीठ की थी उत्पत्ति हुई है माना जाता है कि यहां माता सती के कंठ का निपात हुआ था आपको बता दें कि इस मंदिर में स्थित पार्वती पीठ शक्ति के ५१ सीटों में से प्रमुख है।
दरअसल इस पवित्र गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को मोक्ष के मार्ग के बारे में बताया था और उन्हें अमृत्व का तत्व देने वाली अमर कथा सुनाई थी यही कारण है कि भगवान शिव के इस धाम को अमरनाथ कहा गया है
कथा सुनाने के लिए भगवान शिव ने किया था पंच तत्वों का त्याग
भगवान शिव ने यह अमर कथा सुनाने के लिए पंच तत्वों पृथ्वी जल वायु आकाश अग्नि का त्याग किया था।
सर्वप्रथम पहलगांव में इन्होंने नंदी बैल को त्यागा था उसके बाद चंदनवाड़ी में अपनी जटाओं से चंद्रमा का त्याग किया।
चंद्रमा का त्याग करने के पश्चात भगवान शिव शेषनाग झील पहुंचे जहां पर उन्होंने अपने गले से सर्पों का त्याग किया उसके बाद महागुणस पर्वत पर पहुंचकर गणेश जी का त्याग किया जब भगवान ने अपना सर्वस्व त्याग दिया उसके पश्चात पंचतरणी स्थान पर पहुंच कर अपने शरीर के अवयव वाले पांच तत्वों को त्यागा उसके बाद पर्वत मालाओं पर पहुंचकर माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाई थी।
अमरनाथ गुफा के कबूतरों की पौराणिक कथा
माता सती ने हिमालय राज के यहां पार्वती के रूप में अपना दूसरा जन्म लिया इससे पहले वह अपने पूर्व जन्म में महाराजा दक्ष की पत्नी थी जिन का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था।
कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती दोनों एक साथ बैठे हुए थे माता पार्वती ने भगवान शिव के कंठ में में पड़ी मुंडमाला को देखकर बड़े आश्चर्य से पूछा कि आप ही मुंडमाला क्यों धारण करते हैं?
इस बात पर भगवान शिव ने उनकी जिज्ञासा को दूर करते हुए बताया कि उन्होंने जितनी बार अपने शरीर का त्याग किया है। भगवान शिव ने उतनी ही मुंडमालाओं का हार धारण किया। इस बात पर पार्वती माता की जिज्ञासा और बड़ी और उन्होंने भगवान शिव से पुनः प्रश्न किया कि मेरा शरीर नश्वर है जो बार-बार मृत्यु को प्राप्त होता है और पुनः में एक नया जन्म लेते हैं। लेकिन आपकी मृत्यु नहीं होती, आप मुझे बताएं कि आप क्यों अमर हैं आप मुझे अमर तत्वों से परिचित कराएं क्योंकि मैं भी अजर अमर होना चाहती हूं।
भगवान शिव ने उत्तर दिया कि उनकी मृत्यु के पीछे अमर कथा है। तब पार्वती जी ने भगवान शिव से अमर कथा सुनने की उत्कंठा जताई। हालांकि कि भगवान शिव ने कई बार उनकी जिज्ञासा को टालने का प्रयास लेकिन जब उन्हें लगा कि अब पार्वती जी की जिज्ञासा बहुत ज्यादा बढ़ गई है तब उन्होंने यह निर्णय लिया कि उन्हें अभी अमर कथा सुना देनी चाहिए।
