अमीरगंज गौशाला में दर्द से कराहती 'गौमाता': बेजुबानों की चीखों और बिछड़ी सांसों ने झकझोरा, प्रभारी संजय सोनी की भूमिका पर उठे सवाल कटनी: क्या किसी सिस्टम का दिल इतना कठोर हो सकता है कि बेजुबान जानवर अपनी ही जगह पर तड़प-तड़पकर दम तोड़ दें और जिम्मेदारों को फर्क तक न पड़े? मध्य प्रदेश के कटनी जिले में नगर निगम द्वारा संचालित अमीरगंज गौशाला से आई तस्वीरें किसी भी इंसान की आत्मा को झकझोर कर रख देने के लिए काफी हैं।
अमले की तैनाती के बावजूद भूख-प्यास से तड़पते बेजुबान
गौरतलब है कि शहर भर में घूमने वाले आवारा मवेशियों को पकड़कर इसी अमीरगंज गौशाला में रखा जाता है। नगर निगम ने इन मवेशियों की देखरेख और चारे-पानी की उचित व्यवस्था के लिए बाकायदा एक पूरा अमला तैनात कर रखा है। लेकिन हकीकत यह है कि कागजों पर तैनात इस अमले के बावजूद बेजुबान मवेशी भूख और प्यास से तड़प-तड़पकर मरने को मजबूर हैं। गौशाला परिसर के भीतर का नजारा देखकर आँखों से आँसू छलक पड़ते हैं। चारों तरफ बदबूदार कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य है, जिसमें बेबस गायें और उनके नन्हे-छोटे बछड़े जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। कई मवेशी बेजान होकर मिट्टी में सने पड़े हैं, तो कुछ आख़िरी सांसें लेते हुए दर्द से कराह रहे हैं। कुछ के शरीर पर गंभीर घाव हैं, जिन पर मक्खियाँ और कौवे मंडरा रहे हैं। नगर निगम प्रशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच इस गौशाला के प्रभारी संजय सोनी की देखरेख और कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
"इन्हें सड़कों पर छोड़ दो, कम से कम ज़िंदा तो रहेंगे" गौशाला में बेजुबानों की यह भयावह हालत देखकर मौके पर पहुंचे *एक स्थानीय समाज सेवी इंदिरा मिश्रा* का दिल भी दहल उठा। उन्होंने भर्राए गले और भारी मन से अपना आक्रोश जताते हुए कहा: "अमीरगंज गौशाला में जो मंज़र देखने को मिला है, उसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप उठेगी। नगर निगम और अधिकारियों द्वारा रख-रखाव के जो दावे किए जाते हैं, यहाँ आकर उनकी ज़मीनी हकीकत सामने आ जाती है। बिना इलाज और उचित व्यवस्था के गायें और नन्हे बछड़े तड़प-तड़पकर मर रहे हैं। अगर प्रशासन और गौशाला प्रभारी इन बेजुबानों को ऐसी नारकीय स्थिति में रखने वाले हैं, तो ईश्वर के लिए इन्हें सड़कों पर ही आज़ाद छोड़ दीजिए। कम से कम वहाँ ये जिंदा तो रहेंगे, इस तरह घुट-घुटकर तो नहीं मरेंगे। इस संगीन लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार है, उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।"
कब जागेगा प्रशासन....? गौशाला तक पहुँचने वाला बाहरी रास्ता भी गहरे कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो चुका है, जो इस बात का सबूत है कि यहाँ व्यवस्था के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। मासूम और बेज़ुबान मवेशियों की यह दुर्दशा देखकर स्थानीय लोगों और गौसेवकों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है। लोगों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, गौशाला प्रभारी संजय सोनी और संबंधित अमले की जवाबदेही तय की जाए तथा मवेशियों के समुचित भोजन, इलाज और सुरक्षा के तत्काल पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
