बड़वारा की 'मझगवां' पंचायत बनी अखाड़ा: नियमों की उड़ रही धज्जियां, 'राम भरोसे' चल रहा सरकारी काम

कटनी (ब्यूरो रिपोर्ट)। शासन की मंशा है कि ग्राम पंचायतों के जरिए अंतिम छोर के व्यक्ति तक विकास पहुंचे, लेकिन जनपद पंचायत बड़वारा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मझगवां में इसके ठीक उलट नजारा देखने को मिल रहा है। यहाँ विकास की गंगा तो नहीं बह रही, अलबत्ता भ्रष्टाचार और दबंगई की 'धूल' जरूर उड़ रही है। मझगवां पंचायत पूरी तरह से 'राम भरोसे' चल रही है, जहाँ सरकारी मुलाजिम ही खुद को भगवान समझ बैठे हैं।

"हम अपनी मर्जी के मालिक..." रोजगार सहायक की खुली दबंगई

मझगवां पंचायत में तैनात ग्राम रोजगार सहायक (GRS) पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजगार सहायक स्वयं को पंचायत का सर्वेसर्वा यानी सरपंच समझता है। नियमों को ताक पर रखकर अपनी मर्जी से पंचायत आना और मर्जी से चले जाना उसकी दिनचर्या बन चुकी है। हद तो तब हो गई जब इस मनमानी पर टोकने वालों को तथाकथित पत्रकारों और रसूखदारों का हवाला दिया जाने लगा। सूत्रों के अनुसार, रोजगार सहायक और सचिव का साफ कहना है कि "हमारा सरपंच नेता है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। हमारा भाई पत्रकार है, हम यहाँ के स्वयं मालिक हैं।" इस तरह की खुलेआम धौंस और दबंगई ने शासकीय तंत्र की साख पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

लाखों की लागत से बना शौचालय बना खंडहर, पैसे की बर्बादी का 'जीता-जागता' उदाहरण

सरकारी पैसे का दुरुपयोग और देखना हो तो एक बार मझगवां तिराहे का रुख कर लीजिए। यहाँ बस स्टॉपेज पर आम जनता और यात्रियों की सुविधा के लिए लाखों रुपए की भारी-भरकम लागत से एक सर्वसुविधायुक्त शौचालय का निर्माण कराया गया था। लेकिन देखरेख के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के चलते आज यह आलीशान शौचालय एक 'खंडहर' में तब्दील हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसे को यहाँ पानी की तरह बहाकर छोड़ दिया गया है। खंडहर हो चुका यह शौचालय आज चीख-चीख कर चिल्ला रहा है कि बड़वारा जनपद के अंतर्गत मझगवां पंचायत में विकास के नाम पर कितना बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है।

जिम्मेदार मौन, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

एक तरफ देश और प्रदेश की सरकारें स्वच्छता और सुशासन के बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ मझगवां पंचायत की यह जमीनी हकीकत दावों की पोल खोल रही है। पंचायत भवन में बैठे कर्मचारियों की तानाशाही और अनुपस्थिति से ग्रामीण अपने छोटे-छोटे कामों के लिए भटकने को मजबूर हैं। अब देखना यह होगा कि इस खबर के प्रकाशन के बाद जिला प्रशासन और जिला पंचायत के वरिष्ठ अधिकारी इस बेलगाम हो चुके पंचायत तंत्र पर क्या कार्यवाही करते हैं, या फिर मझगवां की जनता यूँ ही भ्रष्ट तंत्र के साए में जीने को मजबूर रहेगी।

इस मामले मे बड़वारा सीईओ का कहना है मामला संज्ञान मे आया है है जांच कराई जाएगी प्रभा टेकाम बड़वारा सीईओ कटनी