*बेटी दिवस पर महिला आत्मरक्षा केम्प—समय की सार्थक पहल*
सरदारपुर - राजोद में 26 एवं 27 सितंबर को बेटी दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय महिला आत्मरक्षा प्रशिक्षण केम्प एक सराहनीय और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल है। *इस आयोजन के लिए बेबाक आजाद न्यूज़ पोर्टल एवं प्रेस क्लब राजोद साधुवाद के पात्र हैं।* आज जब बेटियां शिक्षा, खेल, कला, विज्ञान और हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं, ऐसे समय में उन्हें शिक्षा के साथ-साथ आत्मरक्षा के व्यावहारिक गुर सिखाना भी आवश्यक है। आत्मरक्षा का प्रशिक्षण केवल संकट की स्थिति में स्वयं को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे बेटियों में आत्मविश्वास, साहस, सजगता और निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित होती है। एक जागरूक और *आत्मविश्वासी बेटी न केवल स्वयं की सुरक्षा के प्रति सजग रहती है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की मदद करने का साहस भी रखती है।* आज के बदलते सामाजिक परिवेश में अभिभावकों की यह जिम्मेदारी है कि वे बेटियों को केवल सुरक्षित वातावरण देने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें परिस्थितियों का सामना करने के लिए सक्षम भी बनाएं। *शिक्षा उन्हें ज्ञान देती है और आत्मरक्षा उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का साहस देती है।* बेटियों को यह संदेश देना जरूरी है कि वे कमजोर नहीं हैं। उन्हें अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए, सजग रहना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर स्वयं की रक्षा करने में सक्षम होना चाहिए। *बेटी दिवस पर राजोद में आयोजित यह दो दिवसीय आत्मरक्षा केम्प इसी सोच को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है*। ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए, ताकि हमारी बेटियां शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से भी सशक्त बनें। *बेटी सुरक्षित, बेटी शिक्षित और बेटी आत्मनिर्भर*—यही सशक्त समाज की पहचान है।