भारतीय सभ्यता-संस्कृति के अनुकूल स्व-तंत्र स्थापित करना होगा - स्वांत रंजन जी
विशाल भौरसे रिपोर्टर
जयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि भारत की जो पहचान है, संपूर्ण विश्व में उसको बढ़ाने के लिए स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर जाना होगा. स्व-तंत्र स्थापित करना होगा जो हमारी सभ्यता और संस्कृति अनुकूल हो.
वे रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विद्याधर भाग की ओर से “स्वराज-75 स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर” विषय पर आयोजित प्रबुद्धजन संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अपने देश में फ्रेंच, डच, पुर्तगाली और अंग्रेज आए. इन्होंने अपनी ताकत के आधार पर भारत का आर्थिक शोषण किया.
जयपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वांत रंजन ने कहा कि भारत की जो पहचान है, संपूर्ण विश्व में उसको बढ़ाने के लिए स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर जाना होगा. स्व-तंत्र स्थापित करना होगा जो हमारी सभ्यता और संस्कृति अनुकूल हो.
वे रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विद्याधर भाग की ओर से “स्वराज-75 स्वाधीनता से स्वतंत्रता की ओर” विषय पर आयोजित प्रबुद्धजन संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अपने देश में फ्रेंच, डच, पुर्तगाली और अंग्रेज आए. इन्होंने अपनी ताकत के आधार पर भारत का आर्थिक शोषण किया.