ग्वालियर मदरसा कांड: बच्चों के साथ क्रूरता करने वालों पर होगी FIR, सीडब्ल्यूसी ने कलेक्टर को सौंपी रिपोर्ट ।

मदरसा दारूल कुरआन में मप्र राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की कार्रवाई के बाद रेस्क्यू किए गए बच्चों में बुधवार तक 25 बच्चों को माता पिता को सौंप दिया गया।

अब एक बालक शेष है जो बिहार का है और सोशल इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट आने में देरी के कारण बुधवार को उसे सौंपा नहीं जा सका, यह प्रक्रिया अब गुरूवार को पूरी होगी।

वहीं बाल कल्याण समिति ने मदरसा दारूल कुरआन के मामले में अपनी जांच रिपोर्ट जिला कलेक्टर और महिला और बाल विकास विभाग को सौंप दी है।

रिपोर्ट में नजमा, साबिर, अनस के साथ-साथ जावेद, शाकिर के भी नाम

इस रिपोर्ट में बालक और बालिकाओं के साथ मारपीट किए जाने, अवैध ढग से रखे जाने से लेकर भूखा रखने सहित कई बिंदु शामिल किए गए हैं। रिपोर्ट में बाजी नजमा, साबिर और अनस के साथ-साथ पढ़ाने वाले जावेद, मोहम्मद शाकिर के भी नाम हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर अब इस मामले में वैधानिक कार्रवाई के तहत एफआइआर की जाएगी। वहीं मदरसा की मान्यता व दस्तावेज के बिंदु को भी समिति ने प्रमुखता से शामिल किया है जिसमें मदरसा संचालकों पर कार्रवाई हो सकती है।

मंगलवार को 22 बच्चों को सौंपा गया था माता-पिता को

एजी ऑफिस स्थित दारूल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए बच्चों को माता-पिता को सौंपने का सिलसिला दो दिनों से चल रहा है, मंगलवार को 22 बच्चों को माता-पिता को सौंपा गया था। जिस दौरान बाल कल्याण समिति के कार्यालय पर काफी भीड़ रही। बीते शुक्रवार को ही मप्र राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने महिला और बाल विकास विभाग व बाल कल्याण समिति के सदस्यों के साथ संयुक्त छापेमारी दारूल कुरआन मदरसे में की थी। यहां बच्चियों ने बताया कि मदरसे में उनके साथ मारपीट की जाती है और स्कूली पढ़ाई से दूर रखा जाता है। बाजी नजमा, साबिर मारपीट करते हैं और अनस का भी नाम परेशान करने को लेकर बताया।

बच्चियां एक कमरे में बंद मिलीं और उन्हें बुर्का पहनाकर रखा था। वहीं एसडीएम अतुल सिंह की ओर से मदरसे के कक्षों को सील कर दिया गया, वहीं जमीन की जांच भी की जा रही है। जिसमें प्राथमिक तौर पर मस्जिद की जमीन मिसिल बंदोबस्त में दर्ज पता चली है।

मदरसे में पढ़ाने वालों में एक जेयू में फैकल्टी

समिति की जांच में यह भी सामने आया कि मदरसे में पढ़ाने आने वाले दो लोगों में एक जीवाजी यूनिवर्सिटी में फैकल्टी है। बालकों को नहाने से मना किया जाता था और भूखा भी रखा जाता था। इसके अलावा बच्चियों की तरह बालकों की भी पिटाई होती थी व मुर्गा बनाया जाता था।

आयोग भी दे चुका रिपोर्ट-होती थी क्रूरता

मदरसे में बच्चियों के साथ क्ररता होती थी। बाजी और उसके बेटे-बेटी मारपीट करते थे। बच्चियों को पढ़ाई से दूर रखा जाता था, बच्चियां जमीन पर सोती थीं। बालकों के शौचालय में दरवाजे नहीं थे। एक-एक कमरों में बच्चों को रखा जाता था। मप्र राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग की दारूल कुरआन मदरसे के मामले में मंगलवार को जारी हुई रिपोर्ट में यह सामने आया। आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने ग्वालियर जिले के सभी मदरसों व ऐसे स्थान जहां बालक बालिकाएं रहते हैं उनकी जांच के आदेश दिए हैं। दारूल कुरआन मदरसे में बच्चियों व बालकों के साथ अमानवीय व्यवहार करने वालों पर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सात दिन में आयोग ने निर्देशों के तहत रिपोर्ट भी मांगी है।