जिले में चौपाल लगाकर किसानों को पराली व नरवाई प्रबंधन के लिए किया जा रहा है जागरूक

किसानों को फसल अवशेष न जलाने की समझाइश

धान कटाई के बाद उपलब्ध कृषि यंत्रों से सीधे बोनी करने की दी जानकारी

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं सिंचाई के पानी की बचत पर जोर

ग्वालियर, 27 अक्टूबर 2026/ ग्वालियर जिले में नरवाई एवं धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। इस क्रम में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला स्तर से गठित दलों द्वारा मंगलवार को विभिन्न ग्रामों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस दौरान चौपाल लगाकर पिछले वर्ष नरवाई एवं पराली जलाने की घटनाओं से प्रभावित ग्रामों में पहुंचकर किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने तथा खेतों में आग नहीं लगाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक कृषि यंत्री तथा विभाग के अधिकारियों ने नरवाई प्रबंधन पर प्रशिक्षण भी दिया।

उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास श्री भानु प्रकाश शर्मा ने बताया कि जागरूकता अभियान के दौरान किसानों को बताया गया कि धान की कटाई के बाद खेत में बचे फसल अवशेषों को जलाना भूमि की उर्वरता, पर्यावरण और कृषि उत्पादन की दृष्टि से नुकसानदायक है। नरवाई जलाने से मिट्टी में उपलब्ध जैविक पदार्थ एवं लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते हैं। इसके अतिरिक्त धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ता है तथा आग अनियंत्रित होने पर आसपास की फसलों, पेड़-पौधों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।

धान कटाई के बाद उपलब्ध कृषि यंत्रों से सीधे बोनी करने की सलाह

अभियान के दौरान किसानों को जिले में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्रों एवं फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों को समझाया गया कि धान की कटाई के बाद खेत में उपलब्ध नमी, मिट्टी की स्थिति तथा आगामी फसल की आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त कृषि यंत्रों का उपयोग कर बिना पराली जलाए अगली फसल की बोनी की जा सकती है।

पराली प्रबंधन में कृषि यंत्रों के उपयोग की सलाह

किसानों को हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिलेज सीड ड्रिल तथा उपयुक्त सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल जैसे कृषि यंत्रों की उपयोगिता के बारे में बताया गया। इन यंत्रों का चयन खेत में बचे फसल अवशेषों की मात्रा, मिट्टी की स्थिति तथा बोई जाने वाली फसल के अनुरूप किया जाना चाहिए। इनके समुचित उपयोग से खेत की अनावश्यक जुताई में कमी लाने, उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग करने तथा समय पर अगली फसल की बोनी करने में सहायता मिलती है। किसानों को बताया गया कि धान की कटाई के बाद खेत में पर्याप्त नमी उपलब्ध होने पर उचित तकनीक से सीधे बोनी करने से भूमि की नमी संरक्षित रखने में मदद मिलती है।

मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं लागत में कमी पर विशेष जोर

जिला स्तरीय दलों द्वारा किसानों को नरवाई प्रबंधन के दीर्घकालीन लाभों के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि फसल अवशेषों को जलाने के स्थान पर उनका उचित प्रबंधन करने से मृदा में जैविक पदार्थों के संरक्षण, मिट्टी की संरचना बनाए रखने तथा लाभकारी सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

इसके साथ ही समय पर बोनी, उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग, अनावश्यक जुताई में कमी तथा कृषि कार्यों की लागत घटाने के संभावित लाभों से भी किसानों को अवगत कराया गया। किसानों को सलाह दी गई कि वे अपने खेत की परिस्थितियों के अनुसार कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों एवं कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेकर उपयुक्त कृषि यंत्रों और तकनीकों को अपनाएं।