महाराष्ट्र के गडचिरोली जिले के तेजतर्रार और कर्तव्यनिष्ठ SDPO श्री अजय कोकाटे द्वारा "विश्व तंबाकू निषेध दिवस" के अवसर पर जन-जागरूकता का संदेश.....

इस विशेष कार्यक्रम के दौरान SDPO श्री अजय कोकाटे ने उपस्थित जनसमुदाय को तंबाकू और तंबाकूजन्य पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उनके संबोधन के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

जीवन अनमोल है, इसे व्यसनों में न गंवाएं

SDPO महोदय ने अत्यंत भावुक अपील करते हुए कहा:

"जीवन जीना सरल है, लेकिन हम खुद इसे कठिन बना देते हैं। अपनी मेहनत की कमाई खर्च करके हम तंबाकू जैसे पदार्थ खरीदते हैं और कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियों को खुद निमंत्रण देते हैं। पूरी दुनिया में हर साल तंबाकू के सेवन से लाखों लोगों की मृत्यु होती है। खुद को बचाने के लिए आइए आज ही तंबाकू न खाने का संकल्प लें।"

प्रमुख मार्गदर्शन और अनुभव साझा किए

कार्यक्रम के दौरान SDPO महोदय श्री कोकाटे ने गुटखा और तंबाकू खाने के परिणामों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट किया। उन्होंने व्यसनमुक्ति से जुड़े कुछ प्रेरक अनुभव भी साझा किए:

अनुकरण का प्रभाव: भारत में तंबाकू का सेवन बढ़ने का मुख्य कारण बड़ों का अनुकरण करना है। जब घर के बड़े (माता-पिता या बुजुर्ग) तंबाकू या सिगरेट का सेवन करते हैं, तो बच्चों को लगता है कि यह हानिकारक नहीं है। इसी नकल के कारण नई पीढ़ी व्यसन की गिरफ्त में आ जाती है।

स्वास्थ्य पर प्रहार: तंबाकू के सेवन से शारीरिक क्षमता और प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ी भी कमजोर पैदा हो रही है।

व्यसनमुक्ति का 'सिंपल फंडा' SDPO महोदय श्री कोकाटे ने बताया कि 'प्रेम और नींद की कमी' ही अक्सर व्यसन का मुख्य कारण बनती है। उन्होंने खुद से प्यार करने की सलाह देते हुए तंबाकू छोड़ने का एक सरल मंत्र दिया:

जल सेवन: हर एक घंटे में एक गिलास पानी पिएं।

व्यायाम: प्रतिदिन एक घंटा शारीरिक व्यायाम करें।

ध्यान: मानसिक शांति के लिए एक घंटा ध्यान (Meditation) करें।

उन्होंने विश्वास दिलाया कि इन आदतों को अपनाकर किसी भी नशे को आसानी से छोड़ा जा सकता है।

निष्कर्ष:

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने तंबाकू मुक्ति की शपथ ली। नशामुक्त समाज के निर्माण और सकारात्मक बदलाव के लिए यह एक सराहनीय पहल रही।

रिपोर्ट: महेश पांडुरंग शेंडे