मैहर में खदान की ब्लास्टिंग पर बवाल! स्कूल की दीवारों में दरारों का आरोप, बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा पहुँचा मुख्यमंत्री कार्यालय तक
200 मीटर नो-माइनिंग जोन और 7.5 मीटर सुरक्षा बैरियर की अनदेखी की आशंका, पर्यावरणीय नियमों पर भी उठे सवाल; मुख्यमंत्री कार्यालय से उच्चस्तरीय संयुक्त जांच की मांग
मैहर/भोपाल। मैहर जिले के ग्राम भटूरा स्थित चूना पत्थर खदान में कथित अनियमित खनन और लगातार हो रही ब्लास्टिंग का मामला अब राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन तक पहुँच गया है। खदान के नजदीक संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। भोपाल निवासी आर्यन सोनी ने 29 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं संयुक्त जांच कराने की मांग की है। शिकायत में पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के उल्लंघन, नो-माइनिंग जोन की अनदेखी और खदान से स्कूल भवन को संभावित नुकसान पहुँचने जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
स्कूल भवन में दरारों का आरोप, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
शिकायत का सबसे संवेदनशील पहलू ग्राम भटूरा में खदान के समीप संचालित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की सुरक्षा है। शिकायतकर्ता ने स्थानीय ग्रामीणों की चिंताओं और समाचार माध्यमों में सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि खदान में लगातार होने वाली ब्लास्टिंग के कारण स्कूल भवन में दरारें आ रही हैं और उसकी संरचनात्मक मजबूती प्रभावित होने की आशंका है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों से स्कूल भवन का संरचनात्मक परीक्षण कराने की मांग की गई है। साथ ही ब्लास्टिंग के दौरान उत्पन्न भू-कंपन और वायु दबाव का वैज्ञानिक मापन कराकर यह पता लगाने की बात कही गई है कि भवन में आई दरारों का खदान की ब्लास्टिंग से कोई संबंध है या नहीं।
200 मीटर नो-माइनिंग जोन और 7.5 मीटर सुरक्षा बैरियर पर सवाल
शिकायत के अनुसार, ग्राम भटूरा में खसरा नंबर 15/1 के अंतर्गत 6.104 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित चूना पत्थर खदान को राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण द्वारा 24 जुलाई 2023 को पर्यावरणीय स्वीकृति जारी की गई थी। इसका स्वीकृति क्रमांक EC23B001MP132796 बताया गया है।
शिकायतकर्ता ने पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के पालन पर सवाल उठाते हुए पक्की सड़क से निर्धारित 200 मीटर नो-माइनिंग जोन की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। इसके अलावा पट्टा सीमा के निकट छोड़े जाने वाले 7.5 मीटर के सुरक्षा बैरियर और उत्खनन की निर्धारित सीमा की भी जांच कराने की बात कही गई है।
शिकायत में वर्ष 2026-27 एवं आगामी अवधि के लिए अनुमोदित खनन योजना, उसके पुनरीक्षण, खनन एवं परिवहन की वैधानिक अनुमतियों और पर्यावरणीय शर्तों के पालन का अभिलेखीय परीक्षण कराने की मांग भी की गई है।
कटनी कनेक्शन की चर्चा, वास्तविक संचालन की भूमिका भी जांच के दायरे में आए
खदान के सरकारी अभिलेखों में पट्टाधारी के रूप में के.के. गौतम (कृष्णकांत गौतम) का नाम दर्ज बताया गया है। वहीं क्षेत्र में खदान के वास्तविक संचालन और प्रबंधन को लेकर कटनी के 'पप्पू' नामक व्यक्ति की भूमिका की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।
हालांकि इस संबंध में किसी की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ता की मांग है कि जांच केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि खदान का वास्तविक संचालन कौन कर रहा है, प्रबंधन में किन लोगों की भूमिका है और नियमों के पालन की जिम्मेदारी किसकी है, इसका भी निष्पक्षता से सत्यापन किया जाना चाहिए।
कलेक्टर की निगरानी में संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से कलेक्टर मैहर की निगरानी में संयुक्त जांच समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है। इसमें जिला खनिज अधिकारी, खान सुरक्षा महानिदेशालय, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों को शामिल करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही DGPS सर्वे कराकर खदान की वास्तविक उत्खनन सीमा, गारलैंड ड्रेन, सेटलिंग टैंक, सुरक्षा बैरियर और 200 मीटर नो-माइनिंग जोन की स्थिति का मौके पर सत्यापन कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में पर्यावरणीय मानकों, ब्लास्टिंग नियमों अथवा जनसुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो असुरक्षित खनन एवं ब्लास्टिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए और जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा, जांच में क्या सामने आएगा?
भटूरा खदान का मामला अब सिर्फ खनन नियमों और पर्यावरणीय स्वीकृति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों, शिक्षकों और ग्रामीणों की सुरक्षा का सवाल भी जुड़ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्कूल भवन की दरारों, ब्लास्टिंग से होने वाले कंपन और खदान की सीमाओं की निष्पक्ष जांच करेंगे? क्या कथित अनियमितताओं पर जिम्मेदारी तय होगी?
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुँची शिकायत के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।
