मुड़वारा में कोतवाली पुलिस की चालानी कार्रवाई पर बवाल! गरीब मजदूरों पर कानून का डंडा, रसूखदारों पर मेहरबानी के आरोप
कटनी। कटनी के मुड़वारा क्षेत्र में कोतवाली पुलिस की चालानी कार्रवाई को लेकर गरीब और मजदूर वर्ग में नाराजगी की आवाज उठने लगी है। स्थानीय लोगों और कथित पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस आने-जाने वाले आम लोगों और मेहनत-मजदूरी करने वालों को रोककर चालान की कार्रवाई कर रही है। आरोप तो यहां तक लगाए जा रहे हैं कि गरीब की जेब देखकर कार्रवाई और रसूख देखकर रियायत बरती जा रही है।
कोई मजदूरी करके घर लौट रहा है तो उसे रोककर चालान, कोई दूध बांटकर वापस आ रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई—ऐसी शिकायतों ने कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जेब में सिर्फ 200 रुपये, धारा 185 में चालान का आरोप
एक कथित पीड़ित ने अपनी आपबीती बताते हुए आरोप लगाया कि उसकी जेब में केवल 200 रुपये थे। इसके बावजूद उसके खिलाफ धारा 185 के तहत चालानी कार्रवाई कर दी गई। पीड़ित के मुताबिक पुलिस ने वाहन कोर्ट से छुड़ाने की बात कही।
अब सवाल यह है कि दिनभर मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाला व्यक्ति कोर्ट-कचहरी की प्रक्रिया और अतिरिक्त खर्च का बोझ कैसे उठाए? वाहन छुड़ाने के लिए उसे करीब 10 किलोमीटर तक ऑटो या पैदल जाने की मजबूरी का सामना करना पड़ा।
गरीब की मजबूरी पर कार्रवाई, जान-पहचान वालों को राहत?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने अपनी जान-पहचान और रसूख का हवाला दिया तो उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि गरीब व्यक्ति अपनी परेशानी बताता रहा। यदि यह आरोप सही है तो यह सवाल बेहद गंभीर है कि क्या कानून सबके लिए बराबर है या आर्थिक हैसियत और पहचान के आधार पर कार्रवाई का तरीका बदल जाता है?
हालांकि रसूखदारों को छोड़ने और गरीबों को निशाना बनाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
रात के अंधेरे में कार्रवाई पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने रात के समय होने वाली पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने पुलिस पर अवैध वसूली के कथित आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतों के सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
आखिर गरीब अपनी फरियाद लेकर जाए तो जाए कहां?
मजदूर वर्ग का कहना है कि पुलिस यदि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है तो नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से कराया जाना चाहिए। गरीब हो या अमीर, मजदूर हो या रसूखदार—कानून की नजर में सभी बराबर होने चाहिए।
लेकिन यदि कार्रवाई में भेदभाव के आरोप लग रहे हैं तो यह महज चालान का मामला नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है।
वरिष्ठ अधिकारियों से जांच की मांग
स्थानीय लोगों और कथित पीड़ितों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि मुड़वारा क्षेत्र में हाल की चालानी कार्रवाइयों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। किन लोगों के चालान काटे गए, किन धाराओं में कार्रवाई हुई और क्या किसी व्यक्ति को जान-पहचान या प्रभाव के चलते छोड़ा गया—इन तमाम बिंदुओं की जांच होने पर ही सच्चाई सामने आ सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर कानून सबके लिए बराबर है तो कार्रवाई में भी बराबरी क्यों नहीं दिखनी चाहिए? गरीब मजदूर अपनी मेहनत की कमाई से परिवार चलाए या चालान और कोर्ट की प्रक्रिया में उलझे?
कोतवाली पुलिस पर लगे इन आरोपों का सच जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन शिकायतों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
