मुंबई की क्राइम ब्रांच यूनिट ने 'डिजिटल लुटेरों को गिरफ्तार किया है. ये आरोपी बैंक लोन के लिए संपर्क करने वाले लोगों के दस्तावेज जुटाते थे और फिर इन दस्तावेजों की मदद से बैंकों से क्रेडिट कार्ड बनवाते थे. आरोपियों ने बैंकों से लोन भी ले रखा था. चौंकाने वाली बात यह है कि कि आवेदकों को खुद के नाम पर ऋण होने की भनक तक नहीं लगती थी. पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि गिरोह के सदस्यों ने उनसे संपर्क करने वाले लोगों के दस्तावेज जुटाए थे और अलग-अलग बैंकों से करीब 200 क्रेडिट कार्ड जारी करवा लिए थे.