*पुलिस को ही लूट लिया 23 वर्ष के विक्रांत तोमर उर्फ विक्की ने*

किस्सा है बागपत के 26 साल के विक्रांत तोमर उर्फ विक्की का। न कोई पुश्तैनी रईसी, न कोई बड़ा कारोबार... लेकिन हाथ में इंस्टाग्राम, दिमाग में फरेब का ब्लूप्रिंट और चेहरे पर बेपनाह आत्मविश्वास।

पुलिस पूरे शहर को सतर्क रहने की नसीहत देती है... उसी के 20 सिपाही एक किराए की ऑडी और चंद सेकंड की रील पर अपना भविष्य दांव पर लगा बैठे!

सुनने में यह किसी वेब सीरीज का सस्पेंस लग सकता है, लेकिन यह दिल्ली पुलिस के गलियारों में घटी वो कड़वी हकीकत है जिसने खाकी के होश उड़ा दिए हैं।

मैडम, मुझे भी पुलिस में आना है विक्की को पता था कि खाकी पर सीधे हमला नहीं किया जा सकता, इसलिए उसने हमदर्दी का रास्ता चुना। उसने दिल्ली पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल को इंस्टाग्राम पर अप्रोच किया— मैडम, मैं क्रिकेटर हूँ, स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस जॉइन करना चाहता हूँ... बस थोड़ी सी गाइडेंस चाहिए।

वर्दी वालों का स्वाभाव होता है अपने महकमे में आने वालों की मदद करना। बातचीत शुरू हुई। इंस्टाग्राम से नंबर व्हाट्सएप पर आया। और यहीं से शुरू हुआ ‘माइंड गेम’।

व्हाट्सएप पर जो डीपी और स्टेटस दिखते थे, वो किसी को भी भरमा देने के लिए काफी थे

कभी मर्सिडीज का स्टीयरिंग, तो कभी ऑडी की सनरूफ।

फाइव-स्टार होटलों की लॉबी में सूट-बूट और खुद को बड़ा बिजनेसमैन बताने का दावा।

दिल्ली-एनसीआर के कार रेंटल से 5 से 8 हजार रुपये रोज पर गाड़ियां उठाना, 10 रीलें बनाकर वापस कर देना। लेकिन इंस्टाग्राम की स्क्रीन पर बैठा इंसान यह नहीं देखता कि गाड़ी की आरसी किसके नाम है, वो बस चमक-दमक देखता है।

जब पहली कॉन्स्टेबल को यह यकीन हो गया कि लड़का बेहद रईस, संस्कारी और सेटल्ड है, तो विक्की ने उसके फोन से उसी के ट्रेनिंग बैच का डेटा खंगाल लिया।

उसने उसी बैच की करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों को एक-एक करके अप्रोच किया। किसी को शादी के हसीन सपने दिखाए, तो किसी को अपनी 'कंपनियों' में भारी मुनाफे वाला इन्वेस्टमेंट प्लान।

लड़कियों ने न सिर्फ अपनी खून-पसीने की सैलरी झोंक दी, बल्कि रिश्ते और मुनाफे के चक्कर में बैंकों से पर्सनल लोन ले-लेकर 24-24 लाख रुपये तक इस जालसाज के खाते में ट्रांसफर कर दिए।

न कोई बिजनेस खड़ा हुआ, न कोई बारात आई। सारा पैसा उड़ा

ऑनलाइन सट्टेबाजी (बेटिंग ऐप्स) में,

फाइव स्टार होटलों के बिल भरने में,

और अगली शिकार को फांसने के लिए नई लग्जरी गाड़ियां किराए पर लेने में।

जब पैसे लौटने का वक्त आया, तो फोन बंद होने लगे, बहाने बनने लगे। और आखिर में जब पानी सिर से ऊपर गुजरा, तो पुलिस के पास जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। जिस महकमे की वो सिपाही थीं, उसी थाने में अपनी ही ठगी की रिपोर्ट लिखवानी पड़ी।

बात सिर्फ ठगी की नहीं, हमारी सोच की है यह घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आज के दौर में 'आंखों देखा' सबसे बड़ा फरेब है।

हम इंसान का किरदार नहीं, उसकी रील की क्वालिटी देख रहे हैं।

हम उसकी नीयत नहीं, उसकी गाड़ी का लोगो देख रहे हैं।

जब कानून के दांव-पेंच समझने वाली वर्दीधारी बेटियां इस दिखावे के झांसे में आ सकती हैं, तो सोचिए एक आम घर का नौजवान या परिवार इस सोशल मीडियाई चकाचौंध में कितना असुरक्षित है।

सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चमकती चीज सोना नहीं होती... कभी-कभी वो सिर्फ किराए का पीतल होती है जो आपकी जिंदगी भर की कमाई को समाप्त कर देती है। मोबाइल पर आने वाली रीलस पर भरोसा इतनी जल्दी नहीं करें। #jaioyrpolice #hellojaipur #जयपुरशहर #