राजस्थान की दूरदर्शी पहल: बालिका सैनिक विद्यालयों के माध्यम से तैयार होंगी भविष्य की महिला नेतृत्वकर्ता
सीकर, 1 अक्टूबर 2026। राजस्थान सरकार की बालिकाओं को सैन्य शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने और उन्हें भविष्य में नेतृत्व की भूमिका के लिए तैयार करने की दूरदर्शी पहल अब धरातल पर आकार ले रही है। इसी क्रम में सैनिक विद्यालय चयन समिति के अध्यक्ष कर्नल देव आनंद लोहारोड़ ने हाल ही में सीकर स्थित बालिका सैनिक विद्यालय का दौरा कर विद्यालय में अब तक हुई प्रगति एवं व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
यह दौरा सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ एवं झुंझुनूं के अध्ययन दौरे तथा बीकानेर में बालिका सैनिक विद्यालय की स्थापना से जुड़े शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद किया गया। सीकर में कर्नल लोहारोड़ ने छात्राओं की सुरक्षा, आवासीय व्यवस्था, पेयजल, अभिभावकों से टेलीफोन एवं संपर्क व्यवस्था, कार्यालयीन कार्यप्रणाली, खेल सुविधाओं तथा अन्य आवश्यक आधारभूत व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
विद्यालय के सभागार में अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी, सीकर श्री बाबूलाल गुर्जर की उपस्थिति में छात्राओं के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम से पूर्व कर्नल लोहारोड़ का श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर स्वागत किया गया।
छात्राओं को संबोधित करते हुए कर्नल लोहारोड़ ने राजस्थान सरकार की इस पहल को ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाली पहल बताया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं के लिए सैनिक विद्यालयों की स्थापना प्रदेश की उस दूरदर्शी सोच को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को सैन्य शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्र नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि किसी भी नए संस्थान के प्रारंभिक चरण में कुछ कमियां होना स्वाभाविक है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें लगातार चिन्हित कर दूर किया जाए। उन्होंने विद्यालय में हाल में हुए विकास कार्यों, बजट संबंधी प्रावधानों तथा आवश्यक अधिकारियों की नियुक्ति की दिशा में हो रही प्रगति को सकारात्मक बताया। उन्होंने यह भी बताया कि सैन्य छात्रावास वार्डन की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शेष व्यवस्थाएं भी शीघ्र पूरी होने की उम्मीद है।
छात्राओं का उत्साह बढ़ाते हुए कर्नल लोहारोड़ ने कहा कि वे सैनिक विद्यालय में केवल शिक्षा प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य अधिकारी और राष्ट्र की नेतृत्वकर्ता बनने के उद्देश्य से आई हैं। उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए शारीरिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी दृढ़ होना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सैनिक विद्यालय का मूल उद्देश्य अनुशासन, चरित्र, आत्मविश्वास, शारीरिक क्षमता और नेतृत्व गुणों का विकास करना है।
कर्नल लोहारोड़ ने कहा कि इन विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं में से अनेक भविष्य में भारतीय सशस्त्र बलों तथा अन्य सुरक्षा बलों में अधिकारी बनकर देश का नेतृत्व कर सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राजस्थान की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बनेगी और बालिकाओं के लिए ऐसी योजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनका कार्य केवल एक विद्यालय के संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने पूरी टीम से सरकार की इस दूरदर्शी सोच को सफल मॉडल में बदलने के लिए इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य जारी रखने का आह्वान किया। Priyanka Mali state head Rajasthan
