राजस्थान सरकार की ऐतिहासिक पहल: बालिका सैनिक विद्यालयों के माध्यम से महिला सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण को नई दिशा

लेखक: कर्नल डॉक्टर देव आनंद सिंह लोहा मरोड़

राजस्थान सरकार द्वारा बालिका सैनिक विद्यालयों की स्थापना की पहल महिला सशक्तीकरण, सैन्य तैयारी और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर के मार्गदर्शन में राजस्थान ऐसी व्यवस्था की ओर अग्रसर है, जो उत्कृष्ट शिक्षा, सैन्य अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और चरित्र निर्माण का समन्वय करती है। शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली परंपरा से प्रेरित यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी आदर्श बन सकती है और राष्ट्रीय सेवा में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त कर सकती है।

राजस्थान के वर्ष 2024–25 के बजट में बीकानेर के जमालसर और सीकर में बालिका सैनिक विद्यालय स्थापित करने की घोषणा इस दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम थी। शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावरजी की पहल और सीकर तथा झुंझुनूं में अनुभवी सैन्य अधिकारी के नेतृत्व में बालिका सैनिक विद्यालय विकसित करने का उनका निर्देश दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जो आने वाले वर्षों में ऐतिहासिक सिद्ध हो सकता है। ये संस्थान भावी पीढ़ियों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास में निवेश हैं। इनकी सफलता शिक्षा, प्रशिक्षण, आधारभूत सुविधाओं और संस्थागत प्रबंधन के उच्च मानकों पर निर्भर करेगी।

इस विचार से मेरा व्यक्तिगत जुड़ाव 13 अगस्त 2021 से है, जब जयपुर स्थित सैनिक विश्राम गृह से रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के साथ एक राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई थी। इस संवाद के दौरान मैंने सैनिक विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश, महिलाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में प्रवेश के अवसरों तथा महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन के आदेश जारी करने में हो रही देरी जैसे महत्त्वपूर्ण विषय उठाए। ये मुद्दे सशस्त्र बलों में महिलाओं को समान और सार्थक अवसर सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थे।

राष्ट्रीय स्तर पर सैनिक विद्यालयों में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में प्रयासों को गति मिली। वर्ष 2018–19 में मिजोरम में शुरू की गई प्रायोगिक पहल और वर्ष 2021–22 से अवसरों के विस्तार के साथ महिलाओं के लिए एनडीए के द्वार खुलना भारत की रक्षा शिक्षा व्यवस्था में महत्त्वपूर्ण बदलाव थे। इन निर्णयों ने सिद्ध किया कि समान अवसर और उचित तैयारी मिलने पर महिलाएँ कठिन शैक्षणिक, शारीरिक और नेतृत्व संबंधी मानकों पर खरी उतर सकती हैं।

राजस्थान के प्रस्तावित दस बालिका सैनिक विद्यालयों को सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ और सैनिक स्कूल झुंझुनूं जैसी संस्थाओं की शैक्षणिक एवं सैन्य प्रशिक्षण परंपराओं से प्रेरणा लेनी चाहिए। चित्तौड़गढ़, महाराणा प्रताप और माता पन्ना धाय की भूमि, तथा झुंझुनूं, वीर सैनिकों और राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों की गौरवशाली धरती है। इस महान विरासत से प्रेरणा लेकर ये विद्यालय अनुशासित, आत्मविश्वासी और राष्ट्रभक्त युवतियों का निर्माण करें, जो देश की सेवा के लिए समर्पित हों। सभी दस विद्यालयों के कक्षा छह से बारह तक पूर्ण रूप से संचालित होने पर, प्रत्येक कक्षा में 80 छात्राओं के आधार पर, इनमें एक समय में 5,600 छात्राएँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सैन्य प्रशिक्षण और अनुशासन, नेतृत्व तथा राष्ट्रभक्ति के संस्कार प्राप्त कर सकेंगी।

इसके लिए विद्यालयों में योग्य शिक्षक, प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षा अनुदेशक, अनुभवी सैन्य प्रशिक्षक, आधुनिक कक्षाएँ, सुसज्जित प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, खेल सुविधाएँ और सुरक्षित आवासीय व्यवस्था आवश्यक होगी। शारीरिक दक्षता, नेतृत्व अभ्यास, सामूहिक कार्य, नैतिक शिक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग होने चाहिए। नियमित आकलन और पारदर्शी मूल्यांकन से गुणवत्ता बनाए रखने तथा छात्राओं के संतुलित शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत विकास को सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

प्रत्येक छात्रा की सुरक्षा, गरिमा और समावेशिता भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है। सुरक्षित एवं सहयोगपूर्ण आवासीय वातावरण, उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ, प्रशिक्षित महिला कर्मचारी, प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था और पेशेवर परामर्श प्रणाली इस व्यवस्था के आवश्यक अंग होने चाहिए। विभिन्न सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमियों की छात्राओं को समान अवसर मिलने चाहिए, ताकि उनकी प्रगति आर्थिक परिस्थितियों के बजाय प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प पर निर्भर करे।

यदि राजस्थान सरकार की इस पहल को दीर्घकालिक दृष्टि, पर्याप्त संसाधनों और स्पष्ट मानकों के साथ लागू किया जाता है, तो यह अन्य राज्यों के लिए आदर्श बन सकती है। केंद्र सरकार और अन्य राज्य सरकारों को भी ऐसी संस्थाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए, रक्षा-उन्मुख शिक्षा को सुदृढ़ करना चाहिए और योग्य महिलाओं के लिए सशस्त्र बलों में करियर बनाने के स्पष्ट मार्ग विकसित करने चाहिए।

अंततः इस पहल की सफलता केवल स्थापित विद्यालयों की संख्या से नहीं, बल्कि उनसे निकलने वाले नागरिकों और भावी नेतृत्व की गुणवत्ता से मापी जाएगी। राजस्थान के पास अपनी गौरवशाली सैन्य परंपरा को महिलाओं की राष्ट्रीय सेवा में बढ़ती भागीदारी की प्रगतिशील दृष्टि से जोड़ने का अवसर है। दृढ़ नेतृत्व, प्रभावी क्रियान्वयन और निरंतर जनसमर्थन के साथ बालिका सैनिक विद्यालय सशक्तीकरण, समानता और राष्ट्र निर्माण के प्रभावशाली माध्यम बन सकते हैं।

आज बालिकाओं को सशक्त बनाना, कल भारत के नेतृत्व, सुरक्षा और भविष्य को मजबूत बनाना है। Priyanka mali स्टेट हेड राजस्थान