कर्नल (डॉक्टर) देव आनंद लोहामरोड़, 1947 में अविभाजित भारत ( 41,5000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल) के विभाजन के समय 22% ( 9 लाख 55 000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल ) से बने पाकिस्तान ने शुरुआत से ही राजनीतिक अस्थिरता, सैन्य हस्तक्षेप, आर्थिक संकट और जातीय संघर्षों का सामना किया है। 1971 में इसका पहला विभाजन हुआ, जिससे बांग्लादेश के हिस्से में 1,47,570 वर्ग किलोमीटर (तत्कालीन पाकिस्तान का लगभग 15.27% क्षेत्र एवं पाकिस्तान के पास 8,18,955 वर्ग किलोमीटर तत्कालीन पाकिस्तान का लगभग 84.73% क्षेत्र) क्षेत्र के साथ बांग्लादेश का जन्म हुआ। आज, पाकिस्तान फिर से गहरे संकट में है,

पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति:-

आज पाकिस्तान आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। विदेशी ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा है, महंगाई चरम पर है, और आम जनता सरकार की नीतियों से असंतुष्ट है। सेना और लोकतांत्रिक सरकारों के बीच सत्ता संघर्ष लगातार चलता आ रहा है। उत्तर पश्चिम में टीपीपी द्वारा खैबर पख्तूनवा के बड़े इलाके पर इलाके पर कब्जा किया जाना, दक्षिण मे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा कई इलाकों में कब्जा किया जाना ,ग्लोबल टेरेरिज्म इंडेक्स -2025 की रिपोर्ट में पाकिस्तान को दुनिया के 163 देशों के बीच दूसरे नंबर की रैंक जहां पर पर आतंकवादी हमलों में मरने वालों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 45 प्रतिशत बढ़कर 1,081 हो गई तथा 10 मार्च को जाफर एक्सप्रेस बलूचिस्तान प्रांत के क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही यात्री ट्रेन को अगवा करते हुए 500 लोगों को कैदी बना लिया जाना जैसी घटनाएं पाकिस्तान के टूटने की ओर साफ-साफ इशारा कर रही है।

पाकिस्तान के टूटने के प्रमुख कारण:-

अर्थव्यवस्था का पतन:- पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है। विदेशी कर्ज बढ़ता जा रहा है, और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की शर्तों के कारण पाकिस्तान की संप्रभुता पर भी खतरा मंडरा रहा है, निवेशकों का भरोसा कम हो रहा है, चीन- पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भी अपेक्षित लाभ नहीं दे सका, महंगाई चरम पर है, विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। सरकार के पास नागरिकों को राहत देने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है। बलूचिस्तान और सिंध जैसे क्षेत्रों में यह आर्थिक संकट अलगाववाद को और भड़का सकता है।

बलूचिस्तान में अलगाववाद:-

बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और संसाधन-संपन्न प्रांत है, लेकिन यह क्षेत्र दशकों से अलगाववादी आंदोलनों का केंद्र बना हुआ है। बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य समूह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष चला रहे हैं। वे स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग कर रहे हैं और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का भी विरोध कर रहे हैं। पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान में दमनकारी नीतियाँ अपना रही है, जिससे वहां की जनता में अलगाववादी भावना और अधिक बढ़ रही है।

पख्तून आंदोलन और टीटीपी का प्रभाव:-

पख्तून बहुल खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भी अस्थिरता बढ़ रही है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने हाल के वर्षों में कई हमले किए हैं और सरकार की सत्ता को चुनौती दी है। अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी ने पाकिस्तान में टीटीपी को और मजबूत किया है। पख्तून राष्ट्रवादी समूह भी पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र पख्तूनिस्तान की मांग कर रहे हैं।

सिंध में अलगाववादी आंदोलन:-