उद्योग विभाग में ‘बाबू’ बना बॉस! समय-नियम बेबस, दफ्तर में चलता ‘आराम तंत्र’ कटनी। जिला मुख्यालय के सरकारी कार्यालयों में अनुशासन और समयपालन की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला उद्योग विभाग से सामने आया है, जहां पदस्थ सहायक ग्रेड-3 कर्मचारी दुर्गा प्रसाद सोनी की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, कार्यालय का निर्धारित समय सुबह होने के बावजूद संबंधित कर्मचारी की एंट्री अक्सर 11:30 बजे के बाद दर्ज होती है। इतना ही नहीं, देर से आने के बाद भी वे अपने दायित्वों के निर्वहन में सक्रिय नजर नहीं आते, बल्कि ड्यूटी समय में ही खाली चेंबर या एकांत स्थान पर आराम करते देखे जाते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब खुलेआम होने के बावजूद न तो किसी अधिकारी का भय दिखाई देता है और न ही जवाबदेही का दबाव। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि मजबूत पकड़ के चलते कार्रवाई की संभावना भी बेहद कम नजर आती है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां आम कर्मचारी समय पर उपस्थित होकर काम का दबाव झेलते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही नियमों को ठेंगा दिखाती नजर आती है। नियमों के मुताबिक, मध्यप्रदेश शासकीय सेवा (आचरण) नियमों में समय पर उपस्थिति और कर्तव्यों के प्रति सजगता अनिवार्य है। बिना अनुमति देर से आना, ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतना या कार्यस्थल से अनुपस्थित रहना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जिस पर विभागीय जांच और दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। अब सवाल यही उठता है— क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करेंगे, या फिर ‘जब सैंया भए कोतवाल, तो डर काहे का’ की तर्ज पर चलता रहेगा यह ‘आराम तंत्र’...? फिलहाल, उद्योग विभाग का यह मामला जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आमजन की नजर अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।